योगी के चुनावी बजट में किसान, कामगार और युवाओं पर पूरा ध्यान

योगी सरकार का चुनावी बजट पेश किए जाने में महज चार दिन शेष हैं। मगर पेपरलेस बजट के प्रयोग ने सरकार को बजट प्रस्तावों में अंतिम समय तक बदलाव की गुंजाइश बना दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय विभागों से सत्ताधारी दल के पिछले चुनावी वादों (संकल्प-पत्र) का लगातार अपडेट ले रहा है कि कितने वादे पूरे हुए और कितने अधूरे हैं। अधूरे पड़े कई प्रमुख वादों को सरकार के आखिरी बजट में किसी न किसी रूप में शामिल करने पर माथापच्ची जारी है। 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से प्रस्तावित आवंटन व अतिरिक्त ऋण सीमा की मंजूरी ने कोरोना काल के दंश से आर्थिक संसाधन की तंगी झेल रही सरकार को बड़ी राहत दी है।वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट 5.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। सरकार इंटरमीडिएट उत्तीर्ण कुछ विद्यार्थियों के लिए लैपटॉप, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग, विद्यार्थियों के लिए नई छात्रवृत्ति स्कीम लाकर युवाओं को साध सकती है। नई शिक्षा नीति से जुड़ी कई योजनाएं बजट का हिस्सा हो सकती हैं। इसी तरह कोरोना काल में सर्वाधिक परेशानी उठाने वाले असंगठित श्रमिकों को बीमा योजनाओं की सौगात संभव है। तो बड़ी संख्या में रोजगार देने वाली मनरेगा योजना को भी बजट में पूरी तवज्जो मिलने की उम्मीद है। डीबीटी के जरिए सीधे लाभ देने वाली नई स्कीम आ सकती है।

योगी के चुनावी बजट में किसान, कामगार और युवाओं पर पूरा ध्यान