कोरोना की मार से बेजार कामगार, मुंबई-पुणे से लौट रहे लोगों में लॉकडाउन का खौफ, नहीं हो रही कमाई

महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश बिहार और झारखंड जाने वाली ट्रेनों से आप्रवासी श्रमिकों और अन्य छोटे-मोटे कामकाज करने वालों का घर लौटना जारी है। इनमें ज्यादातर काम-धंधा नहीं मिलने और लॉकडाउन के खौफ के कारण वापस घर जा रहे हैं।

कोरोना की मार से बेजार कामगार, मुंबई-पुणे से लौट रहे लोगों में लॉकडाउन का खौफ, नहीं हो रही कमाई

महाराष्ट्र के मुंबई-पुणे से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जाने वाली ट्रेनों से आप्रवासी श्रमिकों और अन्य छोटे-मोटे कामकाज करने वालों का घर लौटना जारी है। इनमें ज्यादातर कोरोना की वजह से काम-धंधा नहीं मिलने और लॉकडाउन के खौफ के कारण वापस घर जा रहे हैं। कई लोग परिवार में शादी के चलते और कई खेती के कामों के लिए भी घर लौट रहे हैं। हालांकि ज्यादातर आप्रवासियों का कहना है कि यदि मुंबई और पुणे जैसे शहरों में ठीक-ठाक काम मिल रहा होता तो शायद वापस नहीं जाते।

काम धंधा हुआ मंदा

रविवार दोपहर तीन बजे भोपाल स्टेशन से गुजरी लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर ट्रेन खचाखच भरी थी। गोरखपुर जा रहे 50 वर्षीय फयाजुद्दीन ने बताया कि अभी वह जमीन की नपाई कराने जा रहे हैं। मुंबई में काम मंदा चल रहा है। कोरोना की वजह से जिस तरह का माहौल बना है, उस कारण गांव की जमीन को वह जीवनयापन के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

मध्य प्रदेश: दोगुना किराया चुकाकर जा रहे घर

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित बड़वानी जिले से होते हुए पिछले कई दिनों से श्रमिक उत्तर प्रदेश और बिहार जा रहे हैं। आपदा के समय में भी इनसे बस वाले दो से ढाई गुना अधिक किराया ले रहे हैं। पुणे में गैरेज पर काम करने वाले विजय मौर्य ने बताया कि दिक्कतें बढ़ने लगीं तो पत्नी को लेकर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित अपने घर जा रहे हैं। सुभाष यादव भी पुणे में काम करते थे। गुजर-बसर में मुश्किल होने लगी तो बस्ती जिला स्थित घर के लिए निकल पड़े।

शादी-ब्याह के लिए भी लौट रहे लोग

बड़ी संख्या में आप्रवासी मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले से भी होते हुए अपने घरों को जा रहे हैं। हालांकि इनमें से कई के लौटने की वजह कोरोना नहीं है। बस में सफर कर रहे 24 परिवारों में से एक परिवार के मुकेश यादव निवासी गोरखपुर ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लोग सूरत से प्रयागराज, बस्ती व अन्य जिलों के गांवों व शहरों को जा रहे हैं। कोई खेती के काम से तो कोई परिवार में शादी-ब्याह के कारण जा रहा है।