प्राध्यापक का पद छोड़ मत्स्यपालन की पकड़ी राह और रच दी कामयाबी की मिसाल, जानिए

प्राध्यापक से मत्स्यपालक बने पूर्वी चंपारण के यतींद्र कश्यप नीली क्रांति के अग्रदूत बने हैं। अपनी लगन से इन्होंने इस क्षेत्र में खास पहचान बनाई है।

प्राध्यापक का पद छोड़ मत्स्यपालन की पकड़ी राह और रच दी कामयाबी की मिसाल, जानिए

पूर्वी चंपारण :  पग-पग पोखर से भरा पूर्वी चंपारण का बरियरिया चंवर मछली पालन के क्षेत्र में मिसाल कायम कर रहा हैं। इसका श्रेय संग्रामपुर के बरियरिया गांव के प्रगतिशील किसान मदन मोहन प्रसाद सिंह के पुत्र यतींद्र कश्यप को जाता है। इनका मत्स्य पालन औरस्थापित कश हेचरी नीली क्रांति में अपनी खास पहचान बना रही है। इनसे प्रेरणा पाकर यहां के अन्य किसान भी मत्स्यपालन के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

कुछ नया करने की ठानी और शुरू किया मत्स्यपालन

इतिहास विषय से एमए यतींद्र अरेराज के एक महाविद्यालय में प्रोफेसर थे। लेकिन उनका मन खेती की ओर झुकने लगा। उन्होंने कुछ ही समय बाद शिक्षण संस्थान को अलविदा कह कर बिहार राज्य बीज निगम के लिए करीब पचास एकड़ जमीन में मक्का, गन्ना, गेंहू, तथा आलू की की खेती शुरू कर दी। लेकिन लागत ज्यादा और आय कम होने के चलते उन्होंने इसके तरफ से भी मुंह मोडऩा शुरू किया और कुछ नया करने की ठानी। फिर वर्ष 2013 में पुस्तैनी करीब तीन एकड़ वाले तालाब में मत्स्यपालन शुरू किया। 

40 लाख की सालाना आय पा रहे

वर्ष 2014 में लगभग छह एकड़ जमीन में हेचरी निर्माण किया। हालांकि कम अनुभव के चलते तीन वर्षों तक इन्हें घाटा उठाना पड़ा। लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी और जिला मत्स्य तकनीकी पदाधिकारी, मत्स्य अनुसंधान केंद्र पटना के संपर्क में लगातार रहे। उसी दौरान इनकी मुलाकात कृषि अनुसंधान केंद्र पटना और बिहार सरकार के मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों  से हुई। उनसे मार्गदर्शन पाकर 2019-20 में इस हेचरी ने विभिन्न किस्मों की लगभग 50 करोड़़ मछली के बच्चों की पैदावार की। अब श्री कश्यप की सलाना आय लगभग चालीस लाख रुपये है। 

गीन छोटी मछलियों के उत्पादन की योजना

श्री कश्यप बताते हैं कि अभी मछली पालन का कार्य 25 एकड़ में निॢमत कई तालाबों में किया जा रहा हैं। छोटी व बड़ी मछली बीज भी यहां से मत्स्यपालकों को सप्लाई किए जाते हैं। यहां के बेहतर प्रबंधन को देखते हुए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मछली पालन योजना के तहत रंगीन छोटी मछलियों के उत्पादन के लिए इस हेचरी को चयनित किया है।

पा चुके हैं कई सम्मान

यतींद्र को वर्ष-2019 में भुनेश्वर में तत्कालीन केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री प्रताप चरण सारंगी के हाथों सम्मानित किया गया था। 11 दिसम्बर 2019 को लखनऊ में एन बीएफजीआर द्वारा ये सम्मानित हुए। इसी साल आजतक व भारत सरकार द्वारा आयोजित कृषि समिट में ये सम्मानित हुए। वहीं पिछले साल 22 फरवरी को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा इन्हें सम्मानित किया गया था।

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