नेपाल-बांग्लादेश से मिले सकारात्मक संकेत, ओली ने कहा- मोदी के नेतृत्व में द्विपक्षीय रिश्ते का स्वर्णिम दौर

शनिवार को लालकिला के प्राचीर से पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में नेबरहुड फ‌र्स्ट नीति को विस्तारित करने के संकेत दिए उसी दिन दो पड़ोसी मुल्कों ने हाल के दिनों में रिश्तों में आई असहजता को दूर करने की कोशिश की है। एक तरफ तो नेपाल के पीएम के पी शर्मा ओली ने पीएम नरेंद्र मोदी को टेलीफोन कर आजादी की वर्षगांठ की बधाई दी, तो दूसरी तरफ बांग्लादेश के राजदूत मोहम्मद इमरान ने भारत के साथ रिश्तों को नई ऊंचाई देने का पूरी श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को दिया।

नेपाल ने जब से अपना नया राजनीतिक मानचित्र बदल कर भारत के तीन हिस्सों पर अपना दावा पेश किया है उसके बाद यह दोनो देशों के बीच सबसे उच्चस्तरीय बातचीत है। वहीं, सीएए जैसे मुद्दों पर भारत के साथ असहमति जता चुके बांग्लादेश का संकेत साफ है कि वह आगे बढ़ने को तैयार है। आजादी के 74वें वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि दूरस्थ पड़ोसी देशों के साथ हम अपने हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक, समाजिक व आíथक रिश्ते को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।..आज पड़ोसी सिर्फ वहीं नहीं है, जिसके साथ भौगोलिक सीमाएं जुड़ी हुई हो, बल्कि वो भी हैं जिनसे दिल मिले हुए हों।

हाल के वर्षों में भारत ने विस्तारित पड़ोस के सभी देशों के साथ भी रिश्तों को प्रगाढ़ किया है। पीएम ने खाड़ी क्षेत्र के पश्चिमी एशियाई देशों के रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि इनके साथ भरोसा काफी बढ़ चुका है। इन देशों के साथ हमारा आर्थिक रिश्ता खास तौर पर ऊर्जा सेक्टर में काफी महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में भारतीय वहां काम करते हैं। जिस तरह से इन देशों ने कोरोनावायरस के दौर में भारतीयों की मदद पहुंचाई है और भारत सरकार के आग्रह को स्वीकार किया है उसके लिए हम उनके आभारी हैं।

इसी क्रम में पीएम ने आसियान देशों के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक व धार्मिक रिश्तों का भी जिक्र किया। पीएम ने जिस तरह से इन देशों के साथ सुरक्षा संबंधों को दिए जा रहे विस्तार का जिक्र किया उसका भी अपना महत्व है। नेपाल के पीएम ओली की तरफ से किये गये फोन का यह मतलब भी निकाला जा रहा है कि वह भारत को लेकर अपने रुख में बदलाव कर सकते हैं। ओली ना सिर्फ नेपाल के नए राजनीतिक नक्शे को लेकर, बल्कि हाल ही में भगवान राम के जन्मस्थान के विषय में विवादित बयान दे चुके हैं। पूर्व में भी वह कई बार भारत के बजाये चीन के निकट जाने की बात करते रहे हैं।

अब सोमवार को भारत व नेपाल के विदेश सचिवों के बीच एक बैठक आयोजित की गई है। इसमें भारत की तरफ से वहां चलाये जा रहे विकास परियोजनाओं के अलावा अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बात होनी है। भारतीय विदेश मंत्रालय चीन के साथ बढ़ रहे तनाव के मद्देनजर पाकिस्तान के अलावा अन्य सभी पड़ोसी देशों के साथ तनाव वाले मुद्दों सुलझाने में गंभीरता से जुटा हुआ है। एक दिन पहले ही मालदीव को 50 करोड़ डॉलर की भारी भरकम मदद देने का ऐलान किया गया है। आने वाले दिनों में नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान को दी जाने वाली मदद में और वृद्धि करने की संभावना है।