जलस्रोतों पर अतिक्रमण से भी मुजफ्फरपुर में जल संकट

तेजी से घटता जा रहा जलस्तर सकरा क्षेत्र में स्थिति हर वर्ष हो जाती गंभीर। जिले के कुल 2734 जल संचयन संरचना में 491 का अस्तित्व समाप्त।जल-जीवन-हरियाली योजना से जलस्रोतों को जीवन देने की मुहिम। मुशहरी में जलस्तर इससे भी अधिक करीब 23 फीट हो गया है।

जलस्रोतों पर अतिक्रमण से भी मुजफ्फरपुर में जल संकट
file photo

मुजफ्फरपुर, जासं। जिले में जलस्रोतों की कमी नहीं है, मगर इसपर अतिक्रमण ने जलसंकट को बढ़ा दिया। पिछले कई वर्षों से सकरा और मुरौल क्षेत्रों में पेयजल का भीषण संकट आ रहा है। वहां टैंक से पानी पहुंचाया जा रहा है। इस वर्ष भी कुछ इसी तरह के संकेत मिल रहे हैं। उक्त दोनों प्रखंडों में जलस्तर 20 फीट से अधिक नीचे चला गया है। वहीं मुशहरी में जलस्तर इससे भी अधिक करीब 23 फीट हो गया है। कारण में जाएं तो जलस्रोतों पर अतिक्रमण के आंकड़े ही संकट की गवाही दे रहे हैं। 

डीएम प्रणव कुमार की समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि जिले के 1562 सार्वजनिक तालाबों में 440 अतिक्रमित थे। वहीं कुल 2734 जल संचयन संरचना का भौतिक सत्यापन किया गया तो 491 का अस्तित्व ही नहीं पाया गया। वहीं 252 अतिक्रमित पाए गए। आशा की किरण यही जगी है कि जल-जीवन-हरियाली योजना से इन जलस्रोतों को जोड़कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। डीएम के आदेश के बाद पांच एकड़ से कम और इससे अधिक रकबा वाले तालाबों को चिह्नित कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। इसका जीर्णोद्धार करते हुए सुंदरीकरण का भी कार्य किया जाएगा। माना जा रहा कि योजना पूरी होने पर जलस्तर में वृद्धि संभव है।